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खाली मकान

खाली मकान जो मिला, जीरो लिखते जाय।
‘खाली’ कालम सात में, लिख कर पता लगाय।।
लिख कर पता लगाय, क्यों लगे वहां पे ताले।
गिरने को तैयार, या अब गिराने वाले।।
कह ‘वाणी’ कविराज, आय ना किरायेदार।
करे मरम्मत काम, बनाएं फिर षानदार।।


भावार्थः- जनगणना मकान की उपयोगिता दर्षाने के संबंध का आखरी कोड 0 है। कोई भी जनगणना मकान खाली पाया जाता है, उसमें कोई व्यक्ति या परिवार नहीं रह रहा हो और ना वह किसी भी प्रकार के गैर आवासीय प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जा रहा हो तब कालम 7 में ‘खाली’ लिखकर 0 कोड दर्ज करते हुए उस भवन या जनगणना मकान के लिए खाली रहने के कारण पर विषेष ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

‘वाणी’ कविराज कहते हैं कि उस भवन या जनगणना मकान के खाली रहने का मूल कारण क्या यह है कि वह निर्माण इतना जीर्ण-षीर्ण अवस्था में आ चुका है कि जो किसी भी समय स्वतः गिर सकता, या अब मकान मालिक का मन भी ऐसा हो गया है कि वह उसे गिरवा कर अब नव-निर्माण करवाना चाहता है। भवन की मरम्मत करवा कर पुनः षानदार बनाने का मन भी मालिक का हो सकता है। जो भी मूल कारण हो संक्षिप्त में दर्ज करना चाहिए।

नो ईनाम

एक से आठ ना मिला, दे दो नो ईनाम।
चिड़ियाघर, क्लब, सिनेमा, गौषाला, गोदाम।।
गौषाला, गोदाम, पम्प, थियेटर, स्टेडियम।
पषुषेड, कलामंच, चिड़ियाघर, जिमनाजियम।।
कह ‘वाणी’ कविराज कहीं सामुदायिक केन्द्र।
कुक्कुटषाला होय, कहीं सांड प्रजनन केन्द्र।।


भावार्थः-
जनगणना मकान का उपयोग दर्षाने के अन्तर्गत अन्य गैर आवासीय उपयोग दर्षाने के लिए कोड नं. 9 दर्ज करना चाहिए। वे सभी जनगणना मकान जो कोड नं. 1 से 8 तक किसी भी श्रेणी में नहीं आए, वे अधिकांषतः इस श्रेणी में आ सकते हैं।

‘वाणी’ कविराज कहते हैं कि गैर आवासीय उपयोग के अन्तर्गत मनोरंजन, सामुदायिक केन्द्र, क्लब, सिनेमा, चिड़ियाघर, गौषाला, गोदाम, थियेटर, स्टेडियम, पषुषेड, कलामंच, जिमनाजियम, यात्री सेल्टर, प्रतीक्षागृह, विद्युतकेन्द्र, पम्पहाउस, पेट्रोल पम्प, पुस्तकालय, ट्यूबवेलकक्ष, व्यायामषाला, कुक्कुट प्रजनन केन्द्र, सांड प्रजनन केन्द्र इत्यादि सम्मिलित हैं।

सभी जगह भगवान

मंदिर गुंजे आरती, मस्जिद माय अजान।
गुरूद्वारा में पाठ है, सभी जगह भगवान।।
सभी जगह भगवान, है चर्च, सत्संग हॉल।
आजा प्रभु के पास, होगा तू मालामाल।।
कह ‘वाणी’ कविराज, तब कोड लिखो तुम आठ।
रोज प्रार्थना हॉल, बढ़ते जाएं सब ठाठ।।


भावार्थः- जनगणना मकानों की वास्तविक उपयोगिता दर्षाने के अन्तर्गत कोेड नम्बर 8, पूजा-स्थल के लिए है। यदि जनगणना मकान का पूर्णतया उपयोग किसी मन्दिर, गुरूद्वारा, मस्जिद या चर्च इत्यादि में से किसी भी प्रकार के पूजा-स्थल के रूप में हो रहा हो तो वहां कोड नम्बर 8 दर्ज करने होंगे।

‘वाणी’ कविराज कहते हैं कि कहीं मन्दिर में आरती गूंज रही, कहीं मस्जिद में अजान हो रही, कहीं गुरूद्वारा गुरूगं्रथ साहब के पाठ से गूंज रहा है कहीं चर्च में सत्संग हो रहा है। हे प्रिय भक्त क्यांे निराष और उदास है। तू आज से ही प्रभु की षरण में आजा हर प्रकार से मालामाल हो जाएगा। नियमित प्रार्थना, भजन कीर्तन, पूजा आराधना, जप-तप इत्यादि करते रहो, तुम्हारे सभी प्रकार के ठाठ हो जाएंगे।

मशीन

छोटी बड़ी मषीन से, होय जहां निर्माण।
सब काम मषीनें करें, देती जग को त्राण।।
देती जग को त्राण, खुले लाखों वर्कषाप।
दिन हो या रात, हो काम अपने आप।।
कह ‘वाणी’ कविराज, सभी सर्विसिंग स्टेषन।
चांवल, आटा, तेल, मिटाए सबके टेंषन।।


भावार्थः- जनगणना मकानों की वास्तविक उपयोगिता दर्षाने के क्रम में कोड नं. 7, फैक्ट्री/वर्कषॉप/वर्कषेड आदि के लिए सुनिष्चित किया गया है। छोटी-बड़ी मषीनों से जहां निर्माण कार्य किया जाता है। मषीन कम समय में अधिक उत्पादन करके हमारी आवष्यकताएं पूर्ण कर देती हैं। ऐसे कई वर्कषॉप, फैक्ट्रीयां रात-दिन चल रही हैं।

‘वाणी’ कविराज कहते हैं कि कहीं सर्विस स्टेषन है। कहीं चांवल, आटा, तेल की मिलें हैं जो हमारे कई प्रकार के टेंषन दूर कर रही हैं। कुछ वर्कषॉप में वस्तुओं का निर्माण संसाधन, मरम्मत आदि कार्य होते है सूती मिलें, बेकरी, फर्निचर बनाना, डेरी, प्रिटिंग प्रेस आटा, तेल और चांवल की मिलंे लोहारी, सुनारी वर्कषॉप आदि अनेक प्रकार के कार्य होते हैं।

अस्पताल

कोड नम्बर छः लिखना, मिले जब अस्पताल।
डॉक्टर का क्लिनिक सबको, ठीक करे तत्काल।।
ठीक करे तत्काल, प्रसुति गृह बच्चा देय।
एक्सरे नर्सिंग होम, पल-पल पैसा लेय।।
‘वाणी’ ले उपचार, यहां तू चाहे जैसा।
सुने ना कोई बात, बचा ना जेब का पैसा।।

भावार्थः- जनगणना मकान के वास्तविक उपयोग के अन्तर्गत कोड नं. 6 अस्पताल, डिस्पेंसरी आदि के लिए निष्चित हैं। उदाहरण स्वरूप कुछ नाम भी दिए गए हैं आपके ब्लॉक में यदि ऐसा कोई भवन आता है तो कालम 7 में उसे नाम सहित लिखना होगा।

‘वाणी’ कविराज कहते हैं कि अस्पताल नैदानिक, नर्सिंग होम, प्रसूति गृह, दन्त क्लिनिक डिस्पेंसरी, टीकाकरण केन्द्र, एक्सरे क्लिनिक, प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र। यह राजकीय एवं निजी दोनों ही प्रकार के हो सकते हैं। कोड नं. में कोई अन्तर नहीं आवेगा।

इस भौतिकवादी अर्थयुग में जब तक पैसा है तब तक आप चाहो जहां चाहो जैसे हॉस्पिटल से ट्रीटमेन्ट लेते रहो, किन्तु जब पैसा खत्म हो जाएगा तब से आपका ट्रीटमेन्ट लगभग बन्द हो जाएगा। उस दिन आपको दुनिया का एक बहुत बड़ा नया तर्जुबा होगा कि पैसा अपने आप में कितनी बड़ी दवा है और यही पैसा अपने आप में कितनी बड़ी बीमारी है।

अपना हाउस

रुकते हे मुसाफिर जहां, कहते उसको लॉज।
लॉज लॉज में लाज गई, अई ना उनको लाज।।
अई ना उनको लाज, चले होटल, धर्मषाला।
कहीं आश्रम सराय, रेन बसेरा दस माला।।
कह ’वाणी’ कविराज, है बंग्ले गेस्ट हाउस।
सब पैसो के खेल, बेहतर अपना हाउस।।


भावार्थः- जनगणना मकान के वास्तविक उपयोग के अन्तर्गत कोड नं. 5 सभी प्रकार की होटले, लॉज, गेस्ट हाउस के लिए सुनिष्चित किया गया है। कहीं मुसाफिर रुक रहे हैं। होटल, गेस्ट हाउस हैं, जहां आए दिन कई महिलाओं का प्रकृति प्रदत लज्जा रूपी अमूल्य सौन्दर्याभूषण बहुमूल्य से मूल्यवान होता हुआ मूल्यहीन हो जाता है। बेवक्त की चन्द मजबूरियां रफ्ता-रफ्ता शौक में तब्दिल होकर खानदानी दुपट्टेे के नीचे अय्याषी का जामा पहन लेती है। लम्बे अर्से तलक वो जिन्दगी इतनी कमजोर हो जाती है कि वह ना अपनी हकीकत बोल सकती, ना सुन सकती।

’वाणी’ कविराज कहते हैं कि कोड नं. पांच पाने वालांे में होटलें, धर्मषाला, आश्रम, सराय, रेन बसेरा, बंगला, गेस्ट हाउस, सर्किट हाउस, डाक बंगले ऐसे कई निर्माण आते हैं उक्त सभी भड़कीली व्यवस्थाओं के नाम से सुविधाओं एवं दुविधाओं के सम्मिश्रित हाऊस हैं, मगर सबसे अच्छा व बेहतरीन हाऊस तो वो हाऊस होता है जो हर दृष्टिकोण से अपना हाऊस है।

स्कूल कॉलेज

पढ़े पाठ बालक कहीं, सीखे नव संगीत।
कहीं सीख कर नाचना, बने खेत के मीत।।
बने खेत के मीत, सब जाय स्कूल कॉलेज।
सीखके शार्ट हैण्ड, सभी बढ़ाते नॉलेज।।
साक्षरता के केन्द्र, कहीं आई.टी.आई.।
कोड लिखो जी चार, भूलो न कोई भाई।।


भावार्थः- कॉलम संख्या सात में भवन का वास्तविक उपयोग दर्षाने में कोड चार स्कूल कॉलेज आदि के लिए हैं । स्कूल ,कॉलेज, प्रषिक्षण केन्द्र, आई.टी.आई. इत्यादि इस श्रेणी में आते हैं।

’वाणी’ कविराज कहते हैं कि कहीं बालक विद्या अध्ययन कर रहें हैं, संगीत सीख रहे हैं, कहीं डान्सिंग स्कूल में नाचना सीख रहे हैं। षार्ट हैण्ड व टाईपिंग केन्द्र पर जाकर प्रषिक्षण पा रहे हैं। कोई साक्षरता केन्द्रंांे पर जाकर निरक्षरता के अभिषाप से मुक्ति पाने का सफल प्रयास कर रहा है तो कोई कृषि प्रषिक्षण केन्द्र पर कृषि सम्बन्धित ज्ञानार्जन कर रहा है। ऐसे कई प्रकार के ज्ञान विज्ञान कला, व्यावसायिक षिक्षण- प्रषिक्षण केन्द्र हैं जो अहर्निष ज्ञान बांटने का कार्य कर रहेे हैं। उक्त प्रकार का कोई भवन यदि आपके ब्लॉक में आता है तो प्रगणक उसके लिए कोड चार दर्ज करें।

बिराजे तहसीलदार

कपड़ा केमिकल बिकता, कोका कोला चाय।
भोजनालय भी चलते, ठूंस ठूंस कर खाय।।
ठूंस ठूंस कर खाय ,करते कोई जलपान।
बहके बीयर बार, सबका मालिक भगवान।।
’वाणी’ आफिस होय, बिराजे तहसीलदार।
बीमा, थाना, कोर्ट, फायर ब्रोकर सब प्रकार।।


भावार्थः- जनगणना मकान का उपयोग कई जगहों पर दूकान, कार्यालय के रुप में भी होता है, ऐसी स्थितियों में कोड नं. 3 देने के निर्देष हैं। दूकानों में कहीं, कपड़ा, कैमिकल बिकता हुआ मिल सकता है, कहीं कोका कोला सजा हुआ है, कहीं चाय उबल रही है, भोजनालय, कहीं केवल जलपान का ही व्यावसाय चला करता है तो कहीं बीयर बार की महक आती है ।

’वाणी’ कविराज कहते हैं कि इसी प्रकार कहीं कार्यालय भी मिल सकते हैं- यथा तहसीलदार कार्यालय, बीमा कम्पनी, पुलिस थाना, न्यायालय, ब्रोकर कार्यालय फायर स्टेषन, इत्यादि ऐसी अनेक प्रकार की बिल्डींगें मिल सकती हैं। इन्हें कॉलम सात की प्रविष्टी में कोड नं. तीन देने हैं।

अपनी-अपनी किस्मत

कोई बनाय बंगला, कोई महल बनाय ।
कोई कोठी में रहे, अपार्टमेंट रचाय ।।
अपार्टमेंट रचाय, कहीं बने भवन मकान ।
कोई ताने टेंट, कहीं झोपड़ी में षान ।।
’वाणी’ हाउस बोट, कहीं गेेंग मेन हट है ।
कहाय सब आवास, अपनी-अपनी किस्मत है।।



भावार्थः- भवन सब अपनी-अपनी किस्मत के होते हैं। आपने इस जीवन में एवं पूर्व जन्मों में किस-किस प्रकार का पुरुषार्थ किया है। उनमें स्वार्थ एवं परमार्थ का प्रतिषत कितना-कितना था। इन सभी का समग्र फल प्रारब्ध के रुप में प्रत्येक जीवात्मा को मिलता है। प्रारब्ध ही यह निष्चित करता है कि किसको किस प्रकार के भवन में कैसा सुख मिलेगा।

‘वाणी’ कविराज कहते हैं कि किसी को बना बनाया बंगला मिल गया तो किसी ने महल बनवाया, कोई आलीषान कोठी बना रहा है तो कोई अपार्टमेण्ट की रचना में लगा हुआ है कहीं स्थितियां इसके विपरित भी है। लाखोें परिवार टेण्ट लगाकर कहीं झुग्गी झोपड़ी में रहकर ही अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, कहीं हाउस बोट कहीं गैंगमैन हट। इस प्रकार आवास सम्बन्धी विभिन्न प्रकार की बस्तियां सभी क्षैत्रों में पाई जाती है।

वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रम जहां चलता, वहीं बना आवास।
होटल, हॉस्टल दिखते, गेस्ट हाउस निवास।।
गेस्ट हाउस निवास, है कहीं कहीं पर जैल।
कैदी डण्डे खाय, निकले सबका सब तेल।।
कह ‘वाणी’ कविराज, कहीं आवास सह लाज।
आय मुसाफिर रोज, सब साधे अपना काज।।


भावार्थः-
संस्थागत परिवार की प्रमुख पहचान केवल उस संस्था का पंजीयन ही है। पंजीयनोपरान्त ही कोई संस्था वैधानिक स्वरुप में आ सकती है। आवास के साथ कुछ संस्थाएं इस प्रकार की हो सकती हैं- यथा आवास सह वृद्धाश्रम, आवास सह होटल, आवास सह हॉस्टल, आवास सह गेस्ट हाउस, कहीं आवास सह जेल, आवास सह लॉज, इस प्रकार की कई तरह की स्थितियां मिल सकती हैं जो आवास के साथ जुड़ी हो सकती है। उनको आवास सह मानकर दो कोड देने होंगे।

आवास सह अन्य उपयोग

आवास सह अन्य उपयोग, भांत-भांत के मान।
कहीं कपड़ो की दूकान, कहीं लगाए पान।।
कहीं लगाए पान, मीठे फल या मिठाई।
सब्जी जनरल स्टोर, क्या-क्या लाएं हम भाई।।
कह ‘वाणी’ कविराज, फैक्ट्री तभी लिखवाएं।
बिजली का उपयोग हो, आदमी दस आए।।


भावार्थः-
नगरों, महानगरों में आवास सह अन्य उपयोग की स्थ्तिियां सर्वाधिक मात्रा में मिलती हैं। आवास के साथ-साथ क्या-क्या व्यावसायिक कार्य जुडे़ हो सकते हैं उनमें कुछ इस प्रकार है- आवास सह कपड़ो की दूकान, पान की दूकान, फल एवं मिठाई की दूकान, सब्जी जनरल स्टोर इत्यादि। क्या लाएं क्या नहीं लाएं इसी क्रम में ‘वाणी’ कविराज कहना चाहते हैं कि फैक्ट्री को फैक्ट्री तभी कह पाएंगे जब वहां बिजली का उपयोग होता हो और कम से कम दस आदमी वहां कार्य करते हों। ऊपर कुछ नाम व प्रकार बतलाए हैं इनसे मिलते-झुलते कई अन्य व्यावसायिक स्थितियां भी हो सकती है।

क्या होता उपयोग

क्रमांक 63: जनगणना मकान के उपयोग का पता लगाएं

आवास ....................................................1
आवास-सह-अन्य उपयोग..................2
दुकान/कार्यालय...................................3
स्कूल/कॉलेज, आदि...........................4
होटल/लॉज/गेस्ट हाउस, आदि....5 अस्पताल/डिस्पेंसरी, आदि..................6
फैक्ट्री/वर्कषाप/वर्कषैड, आदि........7
पूजा स्थल................................................8
अन्य गैर-आवासीय उपयोग................9
खाली.........................................................0



लाखों की उस बिल्डिंग का, क्या होता उपयोग ।
कोड एक आवास है, संग अन्य उपयोग ।।
संग अन्य उपयोग, वहां लिखो तुम दो कोड ।
दुकान-आफिस तीन, चार कॉलेज के कोड ।।
‘वाणी‘ होटल पांच, छः हॉस्पीटल, फैक्ट्री सात ।
आठ चर्च, नो गैर, जीरो खाली दिन-रात ।।


भावार्थः- तन-मन-धन की लंबी साधना से भवन-निर्माण पूर्ण होता है। नव निर्मित विषाल भवन मानो मालिक का हंसता हुआ सा दिल होता है। जनगणना विभाग की ओर से यह भी जानकारी चाही गई कि प्रत्येक जनगणना मकान का उपयोग किस प्रकार के कार्य में हो रहा है। यदि वह पूर्णतः आवासीय हो तो कोड 1, यदि आवास के साथ-साथ किसी अन्य कार्य में भी उपयोग में लाया जा रहा हो तब कोड नंबर 2 दर्ज करने होंगे। प्रगणकों के लिए कोड नंबर 1 और 2 होना अति महत्त्वपूर्ण इसलिए है कि इन्हीं में उनको सामान्य या संस्थागत परिवार रहते हुए मिलेंगे।

दुकान या किसी भी प्रकार का कार्यालय हो तो कोड नंबर 3, स्कूल, कॉलेज, प्रषिक्षण केन्द्र आदि के लिए कोड 4, होटल, लॉज, गेस्ट हाउस के लिए कोड 5, अस्पताल डिस्पेन्सरी के लिए कोड 6, फैक्ट्री/वर्कषोप/वर्कषेड के लिए कोड 7, किसी भी धर्म का पूजा-स्थल हो तो कोड 8, अन्य गैर आवासीय उपयोग हो तो कोड 9 एवं किसी भी कारणवष खाली पड़ा हुआ हो तो 0 कोड दर्ज करें।